
शुक्रवार 10 अक्टूबर 2025-: राजस्थान और मध्यप्रदेश में कफ सिरप पीने के बाद बच्चों की मौत होने के मामले के बाद अब पूरे देशभर में बच्चों को लेकर भय और आक्रोश का माहौल है। सर्दी हो या फिर खांसी जुकाम में अक्सर करके परिजन अपने बच्चों को बिना किसी योग्य चिकित्सक के परामर्श के कफ सिरप/दवाई दे देतें हैं। परन्तु अभी वर्तमान समय में जिस प्रकार से कफ सिरप बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है उससे सबको सोचने विचारने पर विवश कर देता है अभी हॉल ही में हुई कफ सिरप की घटनाओं को देखकर यह लगने लगा है कि कफ सिरप ही नहीं बल्कि कुछ ऐसी दवाईयां भी है जिन्हें बच्चों को बिना किसी योग्य चिकित्सक के परामर्श के देना खतरनाक भी हो सकता है। इसका कारण यह भी है कि बच्चों और बड़ों के शरीर में दवाओं की क्रिया और प्रतिक्रिया अलग अलग होती है। जो दवाई बड़ों के लिए असरकारक फायदेमंद हो सकती है।, वही दवाई बच्चों के लिए नुकसानदायक प्रतिक्रिया भी साबित हो सकती है। छोटे बच्चों में दवाईयों के प्रतिक्रिया बड़ों की अपेक्षा गंभीर भी हो सकते हैं। इसलिए कभी भी किसी भी बीमारी के समय बच्चों को दवाईयां देने से पहले और खासकर करके पहली बार देते समय योग्य चिकित्सक से समझ लेना जरूरी होता है, वैसे कभी भी बड़े हों या फिर बच्चे बिना योग्य चिकित्सक के दवाईयां नहीं लेनी चाहिए। दवाई फिर चाहे वह प्राकृतिक हो या हर्बल इनके विषय मे योग्य चिकित्सक से परामर्श लेकर ही सेवन करना चाहिए। दवाई लेने के लिए बच्चों और बड़ों के लिए अलग अलग विधियां भी होते हैं। एसिपिरिन(Asprin),एंटीबायोटिक जैसी दवाएं बच्चों को देने से रेये सिंड्रोम नामक गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है। जो कि दिमाग और लीवर को भी नुकसान पहुंचा सकता है। एसिपिरिन सिरदर्द, दांत दर्द, आदि के लिए दिया जाता है इसके अलावा सर्दी जुकाम तेज बुखार मे भी एसिपिरिन लोग लेते हैं। एसिपिरिन का उपयोग खासकरके वायरल इंफेक्शन के समय करने पर और भी हानिकारक हो सकता है। बिना किसी योग्य चिकित्सक के परामर्श के बच्चों को एसिपिरिन दवा नही दिया जाना चाहिए अपने बच्चों को एसिपिरिन या उससे संबंधित कोई भी दवा अपने से नही देना चाहिए । एसिपिरिन को कभी कभार सैलिसिलेट और एसिटाइसैलिसिलिक एसिड के रूप में भी उपयोग में लाया जाता है। हमेशा दवाईयों के लेबल को अच्छे तरीके से पढ़कर ही लेना चाहिए। दवाईयां लेते समय उनकी एक्सपायरी डेट भी जरूर देखना चाहिए। बच्चों को तेज बुखार या दूसरी अन्य बीमारी के समय मे एसिटामिनोफेन या इब्रु प्रोफेन भी देने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श जरूर लेना चाहिए। एसिटामिनोफेन तीन महिने से कम आयु के बच्चों को नही देना चाहिए। बच्चों को लीवर संबंधी शिकायत होने पर भी एसिटामिनोफेन देना ठीक नहीं होता है। आईब्रु प्रोफेन छह महिने से कम आयु के बच्चों को नही देना चाहिए किसी भी अन्य दवाई के साथ आईब्रु प्रोफेन देने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श जरूर लेना चाहिए। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स यह कहती है कि छह वर्ष से कम आयु के छोटे बच्चों को बिना किसी चिकित्सक के परामर्श के सर्दी खांसी की दवाई नहीं देनी चाहिए। गल्ती से भी दवाईयों की अधिक मात्रा देन पर हानिकारक सिद्ध हो सकता है। एंटीबायोटिक दवाईयां केवल बैक्टीरियल इंफेक्शन मे काम करती हैं। वायरल इंफेक्शन में इन्हें नही दिया जाना चाहिए। बहुत लोग हर्बल या प्राकृतिक दवाईयों को पूरी तरह से सुरक्षित मानते हैं परन्तु यह भी बच्चों में एलर्जी/ साइड इंफेक्शन उत्पन्न कर सकते हैं। बच्चों को हमेशा उनके उम्र वजन के हिसाब से दवाईयां दी जाती है। बिना योग्य चिकित्सक परामर्श के बच्चों को कोई भी दवाईयां नहीं देनी चाहिए। कोई भी दवाई को देने से पहले दवाई का लेबल खुराक आदि निर्देश ध्यानपूर्वक जरूर पढ़ना चाहिए। असामान्य लक्षण जैसे कि तेज बुखार उल्टी का होना त्वचा पर रैशों का होना आदि दिखाई पड़ने पर तुरंत ही योग्य चिकित्सक के पास जाकर इलाज करवाना चाहिए। कोई भी दवाई बच्चों को अपनी मर्जी से कभी नही देना चाहिए। दवाई हमेशा योग्य चिकित्सक की देखरेख मै ही लेना चाहिए। ।।यह एक सामान्य जानकारी है।।





